यूंही क़्यामत तक अहले सुन्नत का आना जाना लगा रहेगा।
है महवे आराम आला हज़रत बरेली मरकज़ बना रहेगा।
कोई जले और कोई तड़पे ग़रज़ नहीं हमको हासिदों से
हमारे क़ल्बो जिगर में ज़िंदा हमेशा अख़्तर रज़ा रहेगा।
हयाते ताजुश्शरिआ में ही येह फैसला हो चुका है लोगों
हमारा क़ाइद बनेगा असजद हमारा रहबर ज़िया रहेगा।
खिज़ां की ज़द में ना आएगा येह चमन कभी सुन लो बागियों तुम
इमामे इश्क़ो वफ़ा का गुलशन सदा यूँ ही फूलता रहेगा।
रज़ा के गुलज़ार से अदावत जो रख रहे हैं येह उनकी क़िस्मत
रज़ा के मसलक की नशर में येह डटा हआ है डटा रहेगा।
शायर: Huzoor Gulzar E Millat Masauli UP
Yunhi Qayamat Tak Ahle Sunnat Ka Aana Jana Laga Rahega
Hain Mahve Aaram Aala Hazrat Bareilly Markaz Bana Rahega
Koi Jale Or Koi Tadpe Garaz Nhi Humko Hasidon se
Hamare Qalb o Zigar Me Zinda Hamesha Akhtar Raza Rahega
Hayate TajushSharia Mein Hi Ye Faisla Ho Chuka Hai Logo
Hamara Qaid Banega Asjad Hamara Rahbar Ziya Rahega
Khizan Ki Zad Mein Na Ayega Ye Chaman Sunlo Baghiyon Tum
Imame Ishq o Wafa Ka Gulshan Sada Yun Hi Foolta Rahega
Raza Ke Gulzaar Se Adabat Jo Rakh Rahe Hain Ye Unki Qismat
Raza Ke Maslak Ki Nashr Mein Ye Data Hua Hai Data Rahega