दूर ए दिल रहे है मदीने से - Door Aye Dil Rahe Madine Se With Tazmeen -Bahut Door Hun Mai Safine Se

 

दूर ए दिल रहे है मदीने से - Door Aye Dil Rahe Madine Se With Tazmeen -Bahut Door Hun Mai Safine Se

हूं बहुत दूर मैं सफ़ीने से 

ये तो मुश्किल है ज़हर पीने से

अब लगा ले मुझे भी सीने से 

दूर ए दिल रहे है मदीने से 

मौत बेहतर है ऐसे जीने से 


उन के रोज़े पे हाज़री देना 

अपने दिल को झुकाए तू रखना 

सोजे दिल मेरा अर्ज़ यूं करना 

उन से मेरा सलाम कह देना 

जाके तू ए सबा करीने से 


शान उनकी सभी से बरतर है

उनका हर वस्फ खूब अतहर है

उनके कदमों से ही मुनव्वर है

हर गुले गुलिस्तां मुआत्तर है 

जाने गुलज़ार के पसीने से 


किस कदर प्यार करते हैं मोमिन 

उन से इज़हार करते हैं मोमिन 

नज्द पे वार करते हैं मोमिन

ज़िक्र ए सरकार करते हैं मोमिन

कोई मर जाए जल के कीने से 


जो वसीले के है बिना पहुंचे 

खुल्द में सोचते हैं आ पहुंचे 

नार ए दोज़ख में हैं जा पहुंचे

बारगाह ए खुदा में क्या पहुंचे 

गिर गया जो नबी के ज़ीने से 



तूर बन जाए ये जहां जल कर 

डाले पर्दे खुदा ने हैं इस पर 

वास्ती फिर भी देखें मंज़र 

उस तजल्ली के सामने अख्तर

गुल को आने लगे पसीने से



शायर

खादिमे ताजे तरीकत 

*मुहम्मद समीर रज़ा वास्ती हिक्मती*

 बहराइच शरीफ

MUHAMMAD SAQIB

My Name Is Muhammad Saqib Raza Qadri Qureshi ( SAQIB QADRI ASJADI ) From PILIBHIT Nearest Bareilly Uttar Pradesh India 262001 | I am currently pursuing Bachelor of Arts

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