फ़ज़्ले मौला से बहुत आला है शाने अज़हरी
लाजवाब ओ बेमिसाल है खानदाने अज़हरी
गौस ओ ख्वाजा के करम से आला हज़रत के तुफ़ैल
लहलहता ही रहेगा गुलिस्ताने अज़हरी
आज उर्स ए अज़हरी है इस लिए मिलाद में
सदका लेने आए हैं सब आशिकाने अज़हरी
बासफा दादा भी नाना भी हैं बाबा बासफा
औलिया से पुर है बेशक खानदाने अज़हरी
हज़रते असजद रज़ा खान उस चमन के फूल हैं
नाम है जिस गुल्स्तां का गुलिस्ताने अज़हरी
सिर्फ नामे अज़हरी सरकार सुन कर मुन्तज़्म
जल रहें हैं आज भी सब दुश्मनाने अज़हरी
Manqabat Huzoor TajushSharia
lashkareRaza
NAAT paak
NAAT hindi