जब कभी हम ने ग़म ए जानां को भुलाया होगा | Jab Kabhi Hamne Gam e Jaana Ko Bhulaya Hoga

 

जब कभी हम ने ग़म ए जानां को भुलाया होगा | Jab Kabhi Hamne Gam e Jaana Ko Bhulaya Hoga



जब कभी हम ने ग़म ए जानां को भुलाया होगा 

ग़म   ए  हस्ती   ने   हमें   खून    रुलाया होगा


दामन ए दिल जो सू ए यार खिंचा जाता है 

हो ना हो उस ने मुझे आज बुलाया होगा


आंख उठा कर तो देख मेरे दिल की तरफ़ 

तेरी यादों का चमन दिल में सजाया होगा


गर्दिश ए दौर हमें छेड़ ना इतना वरना 

अपने नालों से अभी हश्र उठाया होगा


डूब जाए ना कहीं ग़म में हमारे आ'लम 

हम जो रो देंगे तो बहता हुआ दरिया होगा


सोचिए कितना हसीं होगा वो लहज़ा ए अख़्तर 

सर बालीं पे दम ए मर्ग वो आया होगा.



Poet : huzoor TajushSharia

MUHAMMAD SAQIB

My Name Is Muhammad Saqib Raza Qadri Qureshi ( SAQIB QADRI ASJADI ) From PILIBHIT Nearest Bareilly Uttar Pradesh India 262001 | I am currently pursuing Bachelor of Arts

Post a Comment

Previous Post Next Post