कह रहे सब यही अख्तर रज़ा खां अज़हरी | Kah Rahe Sab Yahi Akhtar Raza Khan Azhari - Manqabat E Huzoor TajushSharia

 

कह रहे सब यही अख्तर रज़ा खां अज़हरी  | Kah Rahe Sab Yahi Akhtar Raza Khan Azhari - Manqabat E Huzoor TajushSharia

कह रहे सब यही अख्तर रज़ा खां अज़हरी 

हैं खुदा के इक वली अख्तर रज़ा खां अज़हरी 


ढूंढने से भी नहीं मिलता कोई इस दौर में

तेरे जैसा मुत्तकी अख्तर रज़ा खां अज़हरी 


इल्म ओ इरफान ओ अमल का था तू इक कोहे गिरा

बिल यकीं ए सय्यदी अख्तर रज़ा खां अज़हरी 


बज रहा है हर तरफ डंका तुम्हारे नाम का

तुम को वो शोहरत मिली अख्तर रज़ा खां अज़हरी 


इश्क़े सरकार ए दो आलम की बदौलत दोस्तों

हैं यक़ीनन जन्नती अख्तर रज़ा खां अज़हरी 


आशिकों की आंख में अश्कों का इक सैलाब था 

जब तेरी रहलत हुई अख्तर रज़ा खां अज़हरी 


तेरे दिल में थी मुहब्बत मुस्तफा की इस लिए

तुझ से उल्फत दिली अख्तर रज़ा खां अज़हरी 


ठोकर दर दर की खाए किस लिए वारिस रज़ा

छोड़ कर चौखट तेरी अख्तर रज़ा खां अज़हरी 



शायर : 

मुहम्मद वारिस रज़ा अलीमी इलाहाबादी 

MUHAMMAD SAQIB

My Name Is Muhammad Saqib Raza Qadri Qureshi ( SAQIB QADRI ASJADI ) From PILIBHIT Nearest Bareilly Uttar Pradesh India 262001 | I am currently pursuing Bachelor of Arts

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